टैंक में काम करने के लिए उतरे एक के बाद एक श्रमिक, वापस नहीं आने पर मालिक उतरा और उसके बाद जो हुआ तो उड़ गए सबके होश

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टपूकड़ा. खुशखेड़ा में गत्ता निर्माता श्रीकृष्णा इंटरप्राइजेज कंपनी के जहरीली गैस से भरे टैंक में चार लोगों की मौत हो गई तथा फैक्ट्री का ठेकेदार एवं मालिक बेहोश हो गए। जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहरीली गैस से अनजान मजदूर अपने साथियों को बचाने के लिए एक-एक कर टैंक में उतरते रहे और मौत के मुंह में समाते रहे। सबसे आखिर में उतरे फैक्ट्री मालिक को बेहोशी की हालत में रेवाड़ी ले जाया गया, जहां से फैक्ट्री मालिक विजेंद्र को रैफर किया गया, जिन्होंने शाम को गुरुग्राम के वेदांता से दिल्ली के बीच रास्ते में दम तोड़ दिया। रविवार सुबह औद्योगिक क्षेत्र खुशखेड़ा स्थित गत्ता बनाने वाले श्रीकृष्ण इंटरप्राइजेज में कुछ मजदूर काम कर रहे थे। गत्ता बनाने की प्रक्रिया एक टैंक में होती है। इसमें बॉयलर लगा रहता है जो घूमता रहता है और इस प्रक्रिया से लुगदी बनती है। सुबह टैंक में लगे बॉयलर में खराबी आ गई। एक मजदूर मशीन को ठीक करने उतरा, तो वह बेहोश हो गया और चीख निकली। उसकी चीख सुनकर दूसरा मजदूर उसे बचाने उतरा। टैंक में उतरते ही वह भी बेहोश हो गया और पानी में चला गया। ऐसा करते हुए चार मजदूर टैंक में उतरे और सभी बेहोश हो गए। हादसा सुबह करीब 10 बजे हुआ, जब सबसे पहले फैक्ट्री कर्मचारी राममूर्ति टैंक में घुसा था। इसके बाद राममूर्ति टैंक में गैस बनने से बेहोश हो गया, तो उसके साथियों ने उसको आवाज दी, लेकिन नीचे से कोई जवाब नहीं आने पर राजू टैंक में घुसा था। एक के एक बाद 5 लोग टैंक में घुसे थे। सबसे लास्ट में फैक्ट्री मालिक विजेंद्र अंदर गया था। जिनमें से 4 की मौत हो गई, जबकि फैक्ट्री मालिक बिजेंद्र की हालत गंभीर होने पर टपूकड़ा सीएचसी के बाद रेवाड़ी के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से दिल्ली ले जाते समय शाम को रास्ते में दम तोड़ दिया। जबकि राममूर्ति 25 वर्ष, राजू 20, विकास 24 और दौसा निवासी लखन 20 की मौत हो चुकी है। इससे वहां हड़कंप मच गया। मजदूरों ने हल्ला मचाया तथा पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने वहां पहुंचकर मजदूरों की सहायता से सभी को अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने चारों मजदूरों राजू, विकास, राममूर्ति व लखन को मृत घोषित कर दिया। वहीं विजेंद्र सिंह पुत्र महेंद्रसिंह यादव निवासी कायमपुर जोखवास को रेवाड़ी और वहां से गुरुग्राम के वेदांता अस्पताल ले जाया गया। देर शाम गुरुग्राम से दिल्ली ले जाते समय विजेंद्र ने भी दम तोड़ दिया।

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